{"product_id":"2940046054736","title":"Rajarshi (Hindi)","description":"\u003cp\u003eभुवनेश्वरी मंदिर का पत्थर का घाट गोमती नदी में जाकर मिल गया है। एक दिन ग्रीष्म-काल की सुबह त्रिपुरा के महाराजा गोविन्दमाणिक्य स्नान करने आए हैं, उनके भाई नक्षत्रराय भी साथ हैं। ऐसे समय एक छोटी लडकी अपने छोटे भाई को साथ लेकर उसी घाट पर आई। राजा का वस्त्र खींचते हुए पूछा, \"तुम कौन हो?\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eराजा मुस्कराते हुए बोले, \"माँ, मैं तुम्हारी संतान हूँ।\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eलडकी बोली, \"मुझे पूजा के लिए फूल तोड़ दो ना!\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eराजा बोले, \"अच्छा, चलो।\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eअनुचर बेचैन हो उठे। उन्होंने कहा, \"महाराज, आप क्यों जाएँगे, हम तोड़े दे रहे हैं।\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eराजा बोले, \"नहीं, जब मुझे कहा है, तो मैं ही तोड़ कर दूँगा।\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eराजा ने उस लडकी के चेहरे की ओर ताका। उस दिन की निर्मल उषा के साथ उसके चेहरे का सादृश्य था। जब वह राजा का हाथ पकड़े मंदिर से सटे फूलों के बगीचे में घूम रही थी, तो चारों ओर के लता-पुष्पों के समान उसके लावण्य भरे चेहरे से निर्मल सौरभ का भाव प्रस्फुटित होकर प्रभात-कानन में व्याप्त हो रहा था। छोटा भाई दीदी का कपड़ा पकड़े दीदी के संग-संग घूम रहा था। वह एकमात्र दीदी को ही जानता है, राजा के साथ उसकी कोई बड़ी घनिष्ठता नहीं हुई।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eराजा ने लडकी से पूछा, \"तुम्हारा नाम क्या है बेटी?\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eलडकी बोली, \"हासी।\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eराजा ने लड़के से पूछा, \"तुम्हारा नाम क्या है?\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eलडका बड़ी-बड़ी आँखें फाड़े दीदी का मुँह ताकता रहा, कोई उत्तर नहीं दिया।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eहासी ने उसके कंधे पर हाथ रख कर कहा, \"बोल-ना भैया, मेरा नाम ताता है।\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eलडका अपने छोटे-से होंठ जरा-सा खोल कर गंभीर भाव से दीदी की बात की प्रतिध्वनि के समान बोला, \"मेरा नाम ताता है।\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eबोल कर दीदी का कपड़ा और कस कर पकड़ लिया।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eहासी राजा को समझाते हुए बोली, \"वो लडका है-ना, इसीलिए सब उसे ताता बुलाते हैं।\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eछोटे भाई की ओर मुँह घुमा कर कहा, \"अच्छा, बोल-तो मंदिर।\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eलडके ने दीदी के मुँह पर ताक कर कहा, \"लदन्द।\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eहासी ने हँस कर कहा, \"ताता मंदिर नहीं बोल पाता, बोलता है, लदन्द। - अच्छा, बोल-तो कढ़ाई।\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eलडका गंभीर होकर बोला, \"बलाई।\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eहासी फिर हँस पड़ी, बोली, \"हमारा ताता कढ़ाई नहीं बोल पाता, बोलता है, बलाई।\"\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eकह कर चूमते-चूमते उसे परेशान कर डाला।\u003c\/p\u003e","brand":"Sai ePublications \u0026 Sai Shop","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":47108494983408,"sku":"2940046054736","price":2.99,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"url":"https:\/\/shop-qa.barnesandnoble.com\/products\/2940046054736","provider":"Barnes \u0026 Noble (DEV)","version":"1.0","type":"link"}