{"product_id":"2940152549249","title":"dovimala bhandari ki racana-dharmita","description":"\u003cp\u003eबांग्ला में कहा जाता है कि जो साहित्यकार बाल-साहित्य नहीं लिखता उसे स्थापित साहित्यकार कहलाने का कोई हक नहीं।वास्तव में विश्व-कवि रवींद्र ठाकुर तक ने अपनी भाषा में बाल साहित्य का सृजन किया है। स्वाभाविक है कि बांग्ला में पहले से ही उत्कृष्ट बाल साहित्य लिखा जा रहा है,जबकि हिन्दी में आज भी उनके स्वनाम-धन्य महाकवि अथवा समालोचक बच्चों के लिए लिखना साहित्य-सृजन का अंग नहीं मानते। बाल-साहित्य के प्रति उपेक्षा का भाव आज तक बना हुआ है, अन्यथा साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित हिन्दी साहित्य का इतिहास-लेखक उसके प्रति पूर्वाग्रह क्यों अपनाता? उक्त इतिहास में न केवल बाल-साहित्य,बल्कि अहिंदी-भाषा भाषियों का हिन्दी साहित्य-सृजन,विश्व के हिन्दी लेखकों का लेखन आदि विषय भी नहीं लिए गए।\u003c\/p\u003e","brand":"OnlineGatha","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":47122629165296,"sku":"2940152549249","price":2.09,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0737\/7593\/9824\/files\/2940152549249_p0.jpg?v=1764022544","url":"https:\/\/shop-qa.barnesandnoble.com\/products\/2940152549249","provider":"Barnes \u0026 Noble (DEV)","version":"1.0","type":"link"}