{"product_id":"9781329908376","title":"Mansarovar - Part 1 (???????? - ??? 1)","description":"\u003cp\u003eमानसरोवर - भाग 1 \u003c\/p\u003e\u003cbr\u003e \u003cp\u003eअलग्योझा \u003cbr\u003eईदगाह \u003cbr\u003eमाँ \u003cbr\u003eबेटोंवाली विधवा \u003cbr\u003eबड़े भाई साहब \u003cbr\u003eशांति \u003cbr\u003eनशा \u003cbr\u003eस्‍वामिनी \u003cbr\u003eठाकुर का कुआँ \u003cbr\u003eघर जमाई \u003cbr\u003eपूस की रात \u003cbr\u003eझाँकी \u003cbr\u003eगुल्‍ली-डंडा \u003cbr\u003eज्योति \u003cbr\u003eदिल की रानी \u003cbr\u003eधिक्‍कार \u003cbr\u003eकायर \u003cbr\u003eशिकार \u003cbr\u003eसुभागी \u003cbr\u003eअनुभव \u003cbr\u003eलांछन \u003cbr\u003eआखिरी \u003cbr\u003eहीला \u003cbr\u003eतावान \u003cbr\u003eघासवाली\u003cbr\u003e गिला \u003cbr\u003eरसिक संपादक \u003cbr\u003eमनोवृत्ति \u003c\/p\u003e\u003cbr\u003e \u003cp\u003e-------------------- \u003c\/p\u003e\u003cbr\u003e \u003cp\u003eभोला महतो ने पहली स्त्री के मर जाने बाद दूसरी सगाई की तो उसके लड़के रग्घू के लिये बुरे दिन आ गये। रग्घू की उम्र उस समय केवल दस वर्ष की थी। चैन से गाँव में गुल्ली-डंडा खेलता फिरता था। माँ के आते ही चक्की में जुतना पड़ा। पन्ना रुपवती स्त्री थी और रुप और गर्व में चोली-दामन का नाता है। वह अपने हाथों से कोई काम न करती। गोबर रग्घू निकालता, बैलों को सानी रग्घू देता। रग्घू ही जूठे बरतन माँजता। भोला की आँखें कुछ ऐसी फिरीं कि उसे अब रग्घू में सब बुराइयाँ-ही- बुराइयाँ नजर आतीं। पन्ना की बातों को वह प्राचीन मर्यादानुसार आँखें बंद करके मान लेता था। रग्घू की शिकायतों की जरा परवाह न करता। नतीजा यह हुआ कि रग्घू ने शिकायत करना ही छोड़ दिया। किसके सामने रोये? बाप ही नहीं, सारा गाँव उसका दुश्मन था। बड़ा जिद्दी लड़का है, पन्ना को तो कुछ समझता ही नहीं; बेचारी उसका दुलार करती है, खिलाती-पिलाती है यह उसी का फल है। दूसरी औरत होती, तो निबाह न होता। वह तो कहो, पन्ना इतनी सीधी-सादी है कि निबाह होता जाता है। सबल की शिकायतें सब सुनते हैं, निर्बल की फरियाद भी कोई नहीं सुनता! रग्घू का हृदय माँ की ओर से दिन-दिन फटता जाता था। यहाँ तक कि आठ साल गुजर गये और एक दिन भोला के नाम भी मृत्यु का संदेश आ पहुँचा। पन्ना के चार बच्चे थे- तीन बेटे और एक बेटी। इतना बड़ा खर्च और कमानेवाला कोई नहीं। रग्घू अब क्यों बात पूछने लगा? यह मानी हुई बात थी। अपनी स्त्री लाएगा और अलग रहेगा। स्त्री आकर और भी आग लगायेगी। पन्ना को चारों ओर अंधेरा- ही- अंधेरा दिखाई देता था। पर कुछ भी हो, वह रग्घू की आसरैत बनकर घर में न रहेगी। जिस घर में उसने राज किया, उसमें अब लौंडी न बनेगी। जिस लौंडे को अपना गुलाम समझा, उसका मुँह न ताकेगी। वह सुन्दर थी, अवस्था अभी कुछ ऐसी ज्यादा न थी। जवानी अपनी पूरी बहार पर थी। क्या वह कोई दूसरा घर नहीं कर सकती? यही न होगा, लोग हँसेंगे। बला से!\u003c\/p\u003e","brand":"Sai ePublications","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":47137132511472,"sku":"9781329908376","price":2.99,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0737\/7593\/9824\/files\/378760619.jpg?v=1753445554","url":"https:\/\/shop-qa.barnesandnoble.com\/products\/9781329908376","provider":"Barnes \u0026 Noble (DEV)","version":"1.0","type":"link"}