{"product_id":"9781329908482","title":"Geetawali","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eगीतावली\u003c\/b\u003eगोस्वामी तुलसीदास की काव्य कृति है। गीतावली तुलसीदास की प्रमाणित रचनाओं में मानी जाती है। यह ब्रजभाषा में रचित गीतों वाली रचना है जिसमें राम के चरित की अपेक्षा कुछ घटनाएँ, झाँकियाँ, मार्मिक भावबिन्दु, ललित रस स्थल, करुणदशा आदि को प्रगीतात्मक भाव के एकसूत्र में पिरोया गया है। ब्रजभाषा यहाँ काव्यभाषा के रूप में ही प्रयुक्त है बल्कि यह कहा जा सकता है कि गीतावली की भाषा सर्वनाम और क्रियापदों को छोड़कर प्रायः अवधी ही है।\u003c\/p\u003e\u003cbr\u003e \u003cbr\u003e \u003cp\u003eआजु सुदिन सुभ घरी सुहाई |\u003cbr\u003eरूप-सील-गुन-धाम राम नृप-भवन प्रगट भए आई ||\u003c\/p\u003e\u003cbr\u003e \u003cp\u003e\u003cbr\u003eअति पुनीत मधुमास, लगन-ग्रह-बार-जोग-समुदाई |\u003cbr\u003eहरषवन्त चर-अचर, भूमिसुर-तनरुह पुलक जनाई ||\u003c\/p\u003e\u003cbr\u003e \u003cp\u003e\u003cbr\u003eबरषहिं बिबुध-निकर कुसुमावलि, नभ दुन्दुभी बजाई |\u003cbr\u003eकौसल्यादि मातु मन हरषित, यह सुख बरनि न जाई ||\u003c\/p\u003e\u003cbr\u003e \u003cp\u003e\u003cbr\u003eसुनि दसरथ सुत-जनम लिये सब गुरुजन बिप्र बोलाई |\u003cbr\u003eबेद-बिहित करि क्रिया परम सुचि, आनँद उर न समाई ||\u003c\/p\u003e\u003cbr\u003e \u003cp\u003e\u003cbr\u003eसदन बेद-धुनि करत मधुर मुनि, बहु बिधि बाज बधाई |\u003cbr\u003eपुरबासिन्ह प्रिय-नाथ-हेतु निज-निज सम्पदा लुटाई ||\u003c\/p\u003e\u003cbr\u003e \u003cp\u003e\u003cbr\u003eमनि-तोरन, बहु केतुपताकनि, पुरी रुचिर करि छाई |\u003cbr\u003eमागध-सूत द्वार बन्दीजन जहँ तहँ करत बड़ाई ||\u003c\/p\u003e\u003cbr\u003e \u003cp\u003e\u003cbr\u003eसहज सिङ्गार किये बनिता चलीं मङ्गल बिपुल बनाई |\u003cbr\u003eगावहिं देहिं असीस मुदित, चिर जिवौ तनय सुखदाई ||\u003c\/p\u003e","brand":"Sai ePublications","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":47137205715184,"sku":"9781329908482","price":2.99,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0737\/7593\/9824\/files\/9781329908482_p0.jpg?v=1763708624","url":"https:\/\/shop-qa.barnesandnoble.com\/products\/9781329908482","provider":"Barnes \u0026 Noble (DEV)","version":"1.0","type":"link"}