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Raja Sharma

ivana bunina ki mahana kavitayem

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इवान बूनिन रूस के पहले ऐसे लेखक थे जिनको १९३३ में साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था। बूनिन का जन्म २२ अक्टोबर १८७० को उनके पुरखौली घर में वोरोनेज़ में हुआ था। उनका पूरा नाम इवान अलेक्सीविच बूनिन था।

उनके पिताजी, अलेक्सी बूनिन, और उनकी माताजी रूस के उच्च वर्गीय प्राचीन वंश से आये थे। उनके वंशज बहुत प्रभावशाली धनी व्यक्ति थे।

बूनिन परिवार जमींदारों का परिवार था और उनके पास बहुत से दास थे जो दिन रात उनकी सेवा करते थे। दुर्भाग्यवश बूनिन के पिता ने अपनी जमीन और घर ताश के खेल में हार दिया। उनकी इस हार के बाद परिवार पूरी तरह बर्बाद हो गया।

विदेश में रहने वाले रूसी लेखक बूनिन का बहुत सम्मान करते थे और उनको पथप्रदर्शक के रूप में देखते थे। वो रूस के पहले लेखक थे जिनको १९३३ में साहित्य का नोबेल पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

नोबेल पुरस्कार प्राप्ति के बाद उनको विश्व भर के विद्वानो की तरफ से बधाई संदेश मिलने लगे, परंतु सोवियत रूस से एक शब्द भी नहीं प्राप्त हुआ। रूस में उनके नाम और उनकी लिखी किताबों पर निषेध लगा दिया गया था।

नोबेल पुरस्कार लेने के लिये जाते समय उनको जर्मनी से होकर स्टॉकहोम पहुंचना था। उनको नाज़ी सरकार ने जर्मनी में बंदी बना लिया और आरोप लगाया की वो हीरों की तस्करी कर रहे थे। उनको जबरदस्ती कास्टर आयिल पिलाया गया। बूनिन कट्टर नाज़ी विरोधी थे और उन्होने अपने घर में फ्रांस में नाज़ी क़ब्ज़े के दौरान यहूदियों को शरण भी दी थी।

"ए सॅनस्ट्रोक", "द लाइफ ऑफ आर्सेनेव", "लईका", और "त्योमन्य अल्लेई" उनकी महान किताबें हैं। उनकी अनुवादित पुस्तक "शेडोड पाथस" को भी रूसी साहित्य की सर्वोत्तम उपलभ्दियों में गिना जाता है।

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