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Raja Sharma

mahana lekhaka srankhala 12: jorja oravela

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जॉर्ज ऑरवेल वास्तव में एरिक आर्थर ब्लेर का लिखने का नाम था। एरिक आर्थर ने जॉर्ज ऑरवेल के नाम से अंग्रेज़ी साहित्य को अभूतपूर्व योगदान प्रदान किया है।

उनका जन्म २५ जून १९०३ को ब्रिटिश इंडिया में बिहार राज्य के मोतिहारी नाम के शहर में हुआ था। वो एक महान अंग्रेज़ी उपन्यासकार, निबंधकार, पत्रकार, और समीक्षक थे। उनकी रचनाओं में चमकदार गद्य, सामाजिक अन्याय, एकतंत्रवाद का विरोद, और प्रजातंत्र जैसे विषयों को मुख्य कथानक की पृष्ठभूमि में रखा पाया जाता है। वो सामाजिक अन्याय को साधारण जनता तक अपनी रचनाओं से पहुंचाने का प्रयास करते थे।

ऑरवेल को २०वी शताब्दी के सबसे प्रभावशाली लेखकों में स्थान दिया जाता है, और वो अपनी पीढी की अंग्रेज़ी संस्कृति को साहित्य में प्रस्तुत करने वाले सबसे अग्रणी व्यक्तियों में से एक थे। वो कथा लेखन, उपन्यास लेखन के साथ साथ साहित्यिक समालोचना, कविता, और समाचार पत्रों में भी लेख लिखा करते थे।

उनको उनके द्वारा लिखे गये विश्व प्रसिद्ध डिस्टोपियन उपन्यास "नाइनटीन एटी-फोर" के लिये पूरी दुनिया में जाना जाता है। उनका यह उपन्यास १९४९ में प्रकाशित हुआ था। उनका रूपक उपन्यास "ऐनिमल फार्म" विश्व भर के लगभग सभी विद्यालयों में पढ़ाया जाता है। यह उपन्यास १९४५ में प्रकाशित हुआ था।

महान लेखक श्रंखला 12: जॉर्ज ऑरवेल
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परिचय
बाल्यकाल और प्रारम्भिक वर्ष
बर्मा में पुलिस की नौकरी
लंडन और पैरिस
इंग्लेंड वापसी
शिक्षक के रूप में
हैंपस्टीड में बिताया समय
द रोड टू विगन पियर
स्पेन का ग्रह युद्ध
आराम और स्वास्थ्य लाभ
द्वितीय विश्व युद्ध और "एनीमल फार्म"
"ऐनिमल फार्म" की सफलता के बाद
अंतिम महीने और मृत्यु
प्रमुख रचनायें

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