1
/
of
1
Sushil Jain
kaisi ho ciriya?
kaisi ho ciriya?
Regular price
$0.00 USD
Regular price
Sale price
$0.00 USD
Shipping calculated at checkout.
Quantity
Couldn't load pickup availability
वर्तमान में मानव-समाज जिस सांस्कृतिक और पारिस्थित्कीय संकट से गुजर रहा है वह अभूतपूर्व है। हमारे चारों और बढती व्यावसायिकता ने परिस्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। प्रस्तुत काव्य-संग्रह में 'चिड़िया' के रूपक के माध्यम से समकालीन मानव-समाज की इन्हीं विसंगतियों को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है।
Share
