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Ajay Anand

Jungle Book in Hindi

Jungle Book in Hindi

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मशहूर लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने १८९४ में जंगल बुक की रचना की थी। लेखक का बचपन भारत में बीता था, जिससे उनपर भारतीय परिवेश का गहरा असर हुआ होगा। ये असर इस किताब में; खासकर मोगली की कहानी में साफ झलकती है। मैंने बचपन में एक अंग्रेजी पत्रिका में इस कहानी के कुछ अंश कॉमिक्स के रूप में पढ़े थे। फिर उसके बाद दूरदर्शन पर जापान में बनी एनिमेशन फिल्म देखी थी। उस फिल्म के कारण मोगली की कहानी से भारत के कई बच्चे परिचित हुए थे। बाद में १९९० और २००० के दशक में भी कई टीवी चैनलों पर इस फिल्म को दिखाया गया था। आज भी कई पीढ़ियों के लोगों को गुलजार द्वारा रचित गाना “चड्ढ़ी पहन के फूल खिला है” याद होगा।

मैंने हाल ही में इस किताब को किसी ऑनलाइन पोर्टल से खरीदा तो मुझे इसे पढ़ने में बड़ा मजा आया। बचपन की कई यादें ताजा हो गईं। इसके बाद मैंने इसे अपने 12 साल के बेटे को यह किताब पढ़ने को दी। उसे भी यह कहानी पहले से पता थी इसलिये इस किताब को वह समझ पा रहा था। मुझे लगा कि वह इसका आनंद सही से नहीं उठा पा रहा है। मुझे लगता है कि इसका असली कारण है वह क्लासिक अंग्रेजी जिसमें किपलिंग ने इस किताब को लिखा। आज की पीढ़ी के बहुत कम ही लोग ऐसे होंगे जो उस जमाने की अंग्रेजी का भावार्थ ठीक से समझ पाएँगे। मैंने सोचा कि यदि इस किताब को आम बोलचाल की भाषा में अनुवाद कर दिया जाये तो शायद भारत के अधिकाँश बच्चे इसे आसानी समझ पाएँगे और इसका मजा भी ले सकेंगे।

मैंने जब गूगल पर सर्च किया तो मैंने पाया कि इस किताब का हिंदी अनुवाद उपलब्ध नहीं है। फिर मैं अपने काम पर लग गया। इसे अनुवाद करते समय मैंने थोड़ी रचनात्मक स्वतंत्रता लेने की कोशिश की है ताकि अपना भी कुछ पुट डाल सकूँ। यदि आपको यह किताब पसंद आती है तो अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को भी इसे पढ़ने को जरूर कहिए।

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