Dharmendra Rajmangal
Dil Dariya
Dil Dariya
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ये मेरी कविताओं का संग्रह है जिसमें 25 कवितायेँ हैं. जिसमें सब तरह की कवितायेँ मौजूद हैं. चाहे वो मोहब्बत की बात हो या आपके बचपन की, या आपके किसी ऐसे प्यारे व्यक्ति की जिसे आप शिद्दत से चाहते हैं. वो आपको कभी ये न बोल सका कि वो आपको मोहब्बत करता है, लेकिन आप फिर भी उसे चाहते हैं.
उसे उतना ही प्यार करते हैं जितना कि वो भी करता तब करते. एक कविता हमारी जन्मदात्री माँ के बारे में भी है. कुछ मस्ती की कवितायेँ भी इसमें मौजूद हैं. वहीँ कुछ कवितायेँ आपको प्रेरणादायक महसूस होंगीं. आपको कुछ ऐसा महसूस होगा जिससे आपको लगेगा कि हाँ साहब ऐसा तो अपने आसपास होता है.
मुझे उम्मीद है कि पढने के बाद आपको ये कविता संग्रह अपने दिल के करीब लगेगा. और फिर आप मुझे शुक्रिया भी कहेंगे. शुक्रिया.
कविता---बिन साजन के सावन कैसा
बारिश की बूंदों से जलती हीय में मेरे आज सुलगती
पीपल के पत्तो की फडफड जैसे दिल की धडकन धडधड
चूल्हे पर चढ़ गयी कढाई दूर हुई दिल की तन्हाई
लेकिन सबकुछ लागे ऐसा बिन साजन के सावन कैसा.
चलती है सौंधी पुरबाई हुए इकट्ठे लोग लुगाई
उनके वो और वो हैं उनकी खड़ी अकेली मैं हूँ किनकी
हाय रे हाय ये शाम का ढलना रात बिरहिनी सुबह का खिलना
लेकिन सब कुछ लागे ऐसा बिन साजन के सावन कैसा.
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